हमेशा पॉजिटिव कैसे रहे। Always be positive in life in Hindi.

हम खुशहाल जिंदगी पॉजिटिव सोच के साथ जी सकते हैं, पॉजिटिव सोच हमारी जिंदगी को आसान और मजेदार बनाने में मदद करती है, हमारा खुश रहना नब्बे प्रतिशत हमारी सोच पर निर्भर करता है, और मात्र दस प्रतिसत के लिए जीवन में परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं।

पॉजिटिव सोच क्या है ?

पॉजिटिव सोच समस्याओं को अनदेखा करना या यथार्थ से दूर भागना नहीं है, पॉजिटिव सोच जीवन की समस्याओं को सही रूप में लेकर उनके समाधान खोजने की तरफ दिमाग को ले जाने का नाम है, दूसरी तरफ नेगेटिविटी समस्याओं को हमेशा बनाए रखने में विश्वास करती है।

पॉजिटिव सोच के फायदे

अपनी घिसी पीटी जिंदगी में नए अवसर तलाश कर सकते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है तनाव और डिप्रेशन से बचते हैं।

लंबा जीवन आनंद के साथ जीते हैं बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ।

करियर में ऊंचाई पर पहुंचते हैं, नए स्किल्स तेजी से सीखते हैं।

रिश्तों में ताजगी हमेशा बनी रहती है, एक मिलनसार व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

हमेशा पॉजिटिव रहने के दस टिप्स –

दूसरे लोगों से अपनी तुलना नहीं करे–

आप एक यूनिक व्यक्ति हैं, दूसरों के जैसे आप नहीं हो सकते, आपके पास कितना कम है आपके पड़ोसी से ये सोचना अपने आपको सिर्फ चिंता में डालना है, आपको सिर्फ ये देखना है की आपको जितना जरूरत के लिए चाहिए वो है या नहीं, यदि जरूरत से कम है तो आप कमाएं, अब आप सिर्फ बैठकर चिंता करने से धनी नहीं हो सकते आपको पॉजिटिव सोच के साथ काम करना होगा, जिससे आप कमा सकें।

आपके जीवन में शांति मायने रखती है हो सकता है आपके पड़ोसी को शांति मायने ना रखती हो और उसने पैसा गलत तरीकों से ही कमाया हो, इससे आपको फर्क पड़ता है तो आप जान जायेंगे और आप उससे तुलना नहीं करेंगे, ये सिर्फ धन के मामले में ही नहीं सब जगह आप अपनी खुशी जिसमे देखते हैं, वो ही करें, तुलना करने से आप खुश और पॉजिटिव कभी भी नहीं रह पाएंगे।

अपनी ताकत की तरफ ही देखें –

कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं है, कुछ कमजोरी और ताकत का मिश्रण सबमें होता है, हमे अपनी ताकत को हमेशा देखना है, आपकी ताकत हमेशा आपकी कमजोरी पर भारी पड़ती है, आप सिर्फ अपनी कमजोरी को देखकर जिंदगी भर के लिए रोते रह सकते हैं, अपनी ताकत को देखकर आप जीवन में वो सब कुछ पा सकते हैं जो पाना चाहते हैं।

क्या आप कबड्डी खेल सकते हैं यदि दोनों पैरों से विकलांग है, और खड़े भी नहीं हो सकते ?, जी हां मैने मेरी स्कूल में ऐसे छात्र को देखा है जो कबड्डी खेलता था और व्हीलचेयर से चलता था, वो छात्र रेड नहीं कर सकता था लेकिन केचर उससे बेहतर कोई नहीं था जो उसके हाथों की पकड़ में आ गया कभी छुड़ा नहीं पाया, पॉजिटिव सोच आपको वो रास्ते दिखाती है, जो आपको जिंदगी की जिंदादिली से जीने में मदद करते हैं, हम सब विकलांग हैं बस पॉजिटिव सोच की जरूरत है विकलांगता को दूर करने के लिए।

न्यूज, समाचार पत्र की लत को छोड़ें –

हमारी सोच में पॉजिटिविटी की कमी के सबसे बड़े कारण न्यूज और समाचार हैं जो हम शुबह उठते ही सबसे पहले देखते हैं, एक नेगेटिव न्यूज सौ पॉजिटिव न्यूज पर भारी पड़ती है, आप जैसे ही नेगेटिव न्यूज पढ़ते हैं तो आपको लगता है की आप इससे सबसे पहले प्रभावित होंगे, फिर आप उस न्यूज में आगे क्या क्या हो रहा है उस पर नजर रखने के लिए लगातार फॉलो करेंगे, आपका ज्यादातर समय इस चीज में चला जायेगा और जो तनाव व चिंता आपको होगी वो अलग है।

मैं ये नहीं कह रहा की आप खबर ना पढ़ें दुनियादारी की जानकारी, आपके आस पास क्या हो रहा है उसकी जानकारी रखें, लेकिन दिन की शुरुआत इससे ना करें, वैसे भी कोई भी नेगेटिव न्यूज पूरी दुनियां को प्रभावित करेगी आप अकेले उसके शिकार नहीं होंगे, इसलिए आपको अकेले ही उसका हल क्या होगा और कैसे होगा इसपर ध्यान लगाने से ज्यादा जरूरी है अब अपनी जिंदगी में बेहतर क्या हो सकता है इसपर ध्यान लगाएं।

ध्यान करें –

आप पॉजिटिव बने रहे इसके लिए जरूरी है अपने दिमाग, मन में चल रहे अनगिनत विचारों को कुछ समय के लिए रोकना,आपके मन में तेजी से तरह – तरह के विचार आने का कारण है की हम किसी एक लक्ष्य की और नहीं सोच रहे हैं, ध्यान विचारों को नियंत्रित करने का सबसे बेहतर तरीका है।

हर रोज मात्र दो मिनिट के लिए ध्यान करने से शुरुआत करें, एक बार ध्यान करना आप शुरू कर देंगे तो फिर आपको ध्यान में आनंद आने लगेगा, आपका विचारों पर नियंत्रण बढ़ता चला जायेगा, जब विचार पर नियंत्रण हो जायेगा तो आप सिर्फ उसी काम पर फोकस करना सीख जायेंगे जिसको कर रहे हैं, ध्यान आपको इतना पॉजिटिव कर देगा की आपका ध्यान अपने काम से कभी हटेगा ही नहीं।

नकारात्मक वाक्य बोलने से बचें –

हम हर रोज जाने या अनजाने बहुत सारे नकारात्मक वाक्यों का प्रयोग करते हैं, ये वाक्य एक बार बोल लेने के बाद हमारे साथी बन जाते हैं और बार बार बोले जाने के बाद हमारे माइंडसेट को एक जगह फिक्स कर देते हैं, जैसे की ये काम मैं नहीं कर सकता, मेरे में इतना टेलेंट नहीं है, मैं इससे आगे नहीं बढ़ पाऊंगा आदि, आप याद रखें की जो आपके साथ के लोग आगे बढ़े हैं वो आपके फील्ड के हैं, आपके जितनी योग्यता उनमें थी।

इन नकारात्मक वाक्यों की जगह आप मैं करूंगा, मैने सीखना शुरू कर दिया है, मैं समझ रहा हूं वो वहां कैसे पहुंचा, ये वाक्य आपके माइंड को बताएंगे की ये सब काम साधारण हैं और कुछ समय बाद आप भी उस जगह पर होंगे।

अपने बैठने और चलने के तरीके में बदलाव करें –

आपकी बॉडी लैंग्वेज दूसरों को आपकी और आकर्षित करने के साथ ही साथ आपको भी पॉजिटिव फीलिंग का अहसास कराती है, गर्दन और कंधों को ऊंचा उठाकर, फैलाकर तेजी से चलें आप खुद को आत्मविश्वास से भरपूर पाएंगे, झुककर चलना शारीरिक कमजोरी के साथ कमजोर आत्मविश्वास को दर्शाता है, ये शारीरिक बदलाव आपको तुरंत पॉजिटिविटी का अहसास देंगे।

बैठे समय रीढ़ को सीधा रखें आप शरीर में ताजगी और स्फूर्ति बनाए रखने में कामयाब होंगे, कुर्सी पर एकदम धंसकर बैठना ऐसा लगेगा आप बस टाइम काट रहे हैं, पॉजिटिव सोच के बिना आप टाइम का यूज नहीं कर सकते आप टाइम काट जरूर सकते हैं।

भगवान से करीबी बनाए रखें –

आप मंदिर जाते हैं तो आपको एक स्थायी शांति का एहसास मंदिर में होता है, आप सामने भगवान बुद्ध का स्टेच्यू देखते हैं तो एक शांति आप भी अपने अंदर महसूस करते हैं, इंसान सालों से अंतिम निर्णय उपर वाले पर छोड़ता आया है और प्रार्थना करता आया है, आज भले ही हम कहें की ये वैज्ञानिक युग है और किस्मत मुट्ठी में होती है, परंतु पॉजिटिव कैसे रहें इसकी गोली आज तक नहीं बनी है।

जब तक आप पॉजिटिव नहीं रहकर सोचेंगे आपकी किस्मत वाली मुट्ठी कभी भी नहीं खुलेगी, खुलेगी तो पॉजिटिव रहने से ही, इसलिए आप भगवान की शरण में एक बार थोड़ी देर के लिए अपने आपको जरूर लेकर जाएं, ये सोचें की मेरे से जो हो सकता है मैं पूरी ताकत से कर रहा हूं पर को चैतन्य शक्ति इस दुनियां में विराजमान है वो भी मेरे साथ है, वैसे शोधों से ये सामने आया है की आस्तिक लोग डिप्रेशन जैसी बीमारियों का शिकार कम होते हैं।

आशावादी रहें –

अक्सर सुनते हैं आशा पर दुनियां कायम है ये बात सच है, बेहतर की आशा करें अच्छा होगा, पॉजिटिव सोच उसी व्यक्ति में होगी जो आशावादी होगा, हम बहुत कुछ करते हैं पर हमारी सोच और हमारे कार्य के अनुसार नतीजे हमेशा नहीं मिलते, नतीजों का हमारे अनुसार ना होने का कारण है बहुत सारे अन्य बाहरी फैक्टर जिनको हम कंट्रोल नहीं करते, जिन कारणों को हम नहीं कंट्रोल कर सकते उनके लिए हमे हमेशा आशावादी रहना होता है।

हमे कुछ बुरा होने की कल्पना ना करके अच्छे की कल्पना जरूरी है क्योंकि बुरा होगा तो हमे उसका सामना करना ही होगा, सकारात्मक सोच के साथ हम बुरे का सामना करेंगे तो बुरा अच्छे में बदलेगा, नकारात्मक सोच के साथ हम समस्या के हल को और दूर ले जायेंगे, जबकि पॉजिटिव सोच हमे हल को पास में दिखाएगी, आशावाद भी पॉजिटिविटी का ही नाम है।

मन के अनुसार अनुमान लगाएं –

हम ऑफिस पहुंचे और बॉस ने हमेशा से अलग आज रूखे तरीके से आपके अभिवादन को लिया, आप यहां सोच लेते हैं की बॉस आप पर नाराज है, ऐसा हो इसकी प्रोबेबिलिटी बहुत कम है, क्योंकि बॉस किसी घरेलू समस्या से जूझ रहा हो, या फिर बाजार में मंदी के संकेत उसको चिंतित कर रहे हों।

आप अपने मन में ले लेते हैं की बॉस नाराज है तो आपको इससे पूरे दिन नेगेटिविटी को फील करते हुए काम करेंगे, आपकी परफॉर्मेंस खराब होगी और हो सकता है अगले दिन बॉस आपको इस खराब काम के लिए कुछ सुना दे, पहले दिन आपने आपने आपको बिना कोई हकीकत जाने नेगेटिव कर लिया और अगले दिन आपको कुछ सुनना पड़ा, आप मन में नहीं सोचते और समस्या कुछ और थी आपने उसको अपने से जोड़ लिया, हमेशा जो सामने है उसको देखना आपको पॉजिटिव रखेगा, मन में अपने आप किसी चीज को एक समस्या ना बनाएं।

(by. – M. Lal )

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