मोहन की सफलता की कहानी । Inspirational story in Hindi.

मोहन की सफलता की कहानी । Inspirational story in Hindi.

मोहन पढ़ने में बहुत ही होशियार और मेहनती था, और बहुत मन लगाकर पढ़ता था, मोहन हर काम बहुत ही अच्छे से करता था, शुबह उठते ही खेत मे जाकर गायों के लिए चारा लाना व विद्यालय में दिनभर पढ़ना व शाम को लालटेन की रोशनी में homework करना व कल मास्टर जी क्या पढ़ाएंगे उस विषय को भी पढ़कर जाना, क्योंकि कल जब मास्टर जी पढ़ाएंगे तो मोहन को हर विषय आसानी से समझ मे आ जायेगा।

[mc4wp_form id=”1974″]

मोहन की मेहनत को देखकर गांव में सब लोग मोहन को गांव का सबसे होनहार बालक मानते थे, व विद्यालय में सारे शिक्षकों का सबसे प्रिय छात्र मोहन ही था, विद्यालय की कबड्डी टीम में मोहन सबसे अच्छा रेडर था, मोहन की चुस्ती और फुर्ती देखकर विरोधी टीम उसको पकड़ने से हमेशा कतराती थी, मोहन सिर्फ शरीर से ही फुर्तीला नहीं था दिमाग भी बहुत चुस्त और फुर्तीला था, मोहन को पता था कि विरोधी टीम के कोनसे खिलाड़ी के आउट होने के बाद टीम दबाव में आती है।

मोहन गांव के स्कूल में हमेशा ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता था, और इस बार भी बारहवीं में भी उसने पूरे जिले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कलेक्टर से सम्मान प्राप्त किया व गांव में भी सम्मानित हुआ, जहां सरपंच साहब से मोहन की मेहनत व लगन को देखकर आगे की पढ़ाई का पूरा खर्चा खुद उठाने की घोषणा की।

मोहन अब गांव से शहर के एक बहुत नामी कॉलेज में आ गया था, जहां उसने देखा कि शहर के कुछ छात्र जहां मस्ती करते और कॉलेज बस उनके लिए एक पिकनिक पर जाने जैसा था, शहर के छात्र सप्ताह में एक दिन एक आध घंटे के लिए आते और फिर चले जाते, मोहन के साथ गावों के भी छात्र बहुत सारे थे जो मोहन की ही तरह मेहनती और पढ़ाई में बहुत ही होशियार थे।

कुछ दिनों बाद गाँवों के छात्रों की दोस्ती शहर के उन छात्रों से हो गई जो सिर्फ पिकनिक की तरह कॉलेज आते और चले जाते थे, अब क्या था कि गावों के छात्रों की आदतें भी शहर के छात्रों की तरह होने लगी और कुछ दिनों बाद वो सब गावों के छात्र जो मोहन की ही तरह थे अब मोहन से दूरी बनाने लगे और कहने लगे कि तू तो शहर में आकर भी कैसे रहते हैं ये सीख नहीं पाया है, आज भी गाँव का गँवार लगता है बस कॉलेज में आते ही पढ़ने और कमरे में जाते ही पढ़ने बैठ जाता है।

मोहन तू क्या जानेगा जिंदगी का मतलब ऐश करो खाओ – पीओ बस एक दिन मर जाना ये है असली जिंदगी, मोहन तेरे साथ कुछ भी नहीं जाएगा, एक दिन मर जाना है।

मोहन पर इन बातों का कोई असर नहीं होता और बस पूरे समय कॉलेज की पढ़ाई और महापुरुषों की biography व autobiography पढ़ने में समय बीतता, परीक्षा के समय दूसरे छात्र रात को एक से दो बजे तक इस इंतजार में बैठे रहते की दो बजे परीक्षा का पेपर लीक होकर आएगा तो पढ़ लेंगे व नकल के लिए चिट बना लेंगे, अभी पढ़ने की क्या जरूरत है, वो सब छात्र रात को तीन बजे तक सिगरेट फूंकते और बैठे रहते, जबकि मोहन रात को ग्यारह बजे पढ़कर सो जाता ताकि सुबह पांच बजे फिर उठकर पढ़ सके।

मोहन ने अपने अगले पाँच साल तक के लक्ष्यों को एक डायरी में लिख रखा था और रोज सोने से पहले व उठने के बाद अपने लक्ष्यों को पढ़ता और फिर नए दिन की शुरुआत नए जोश के साथ करता, हर सप्ताह अपने लक्ष्यों की समीक्षा करता।

इस साल कॉलेज के अंतिम वर्ष का परिणाम आया तो पहले की तरह मोहन ने सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किया और स्वर्णपदक प्राप्त करने वाला उस गाँव का पहला छात्र बन गया, फिर गाँव मे सम्मान समारोह हुआ और जुलूस निकाला गया जहां सरपंच साहब ने 51000 रुपये का नकद इनाम गाँव की तरफ से मोहन को दिया और खुद की तरफ से आगे की पढ़ाई के लिए सारा खर्च उठाने की बात कही, परंतु इस बार मोहन ने सरपंच साहब का आभार व्यक्त किया और खुद ही ट्यूशन पढ़ाकर और कमाकर पढ़ने की बात कही और सरपंच साहब को धन्यवाद कहा।

आगे पोस्टग्रेजुएट करने के लिए मोहन एक बड़े शहर के बड़े विश्वविधालय में दाखिला लिया और फिर मेहनत करने लगा, इस बार मोहन ने प्रशासनिक सेवा के लिए आवेदन दिया जो कि उसके लक्ष्यों में था, और अब उसको प्राप्त करने का समय आ गया था, मोहन ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों से देश की सबसे बड़ी व मुश्किल मानी जाने वाली परीक्षा की तैयारी के लिए उचित परामर्श प्राप्त किया।

उस विश्विद्यालय की बहुत बड़ी व ऐतिसाहिक किताबों से भरी library, व नए-नए प्रकाशित होने वाले रिसर्च पेपर व जर्नल का विशाल भंडार बहुत ही अच्छा था।

मोहन को अभी भी अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था, समय पर परीक्षा हुई मोहन को पेपर बहुत सरल लगा, पहले परीक्षा फिर इंटरव्यू और फिर अंतिम परिणाम।

शाम को पाँच बजे राज्य के मुख्यमंत्री का फोन आया और बधाई दी, फिर तो बधाइयों का दौर शुरू हो गया।

अगले दिन अखबार में पहले पन्ने पर मोहन की कहानी फोटो के साथ छपी थी, कहानी छपे भी क्यों नहीं जब पहले प्रयास में पहला स्थान जो प्राप्त किया था।

दोस्तों ये कहानी सिर्फ मेहनत के फल की ही कहानी नहीं है इसमें आजकल हमारे colleges और यूनिवर्सिटीज़ में फैले और फल फूल रहे बेकार व युवा पीढ़ी को खत्म करने वाले culture के बारे में भी मैंने जैसा देखा है, और जो कुछ भी अनुभव किया है उसी आधार पर लिखी है।

मोहन की सफलता की कहानी । Inspirational story in Hindi.आपको ये कहानी पसंद आये तो इसे शेयर करें कमेंट करें, सुझाव दें जिनका मुझे हमेशा इंतजार रहता है, successtipshindi.com को subscribe करें।

[mc4wp_form id=”1974″]

Leave a comment