शर्मीलेपन से कैसे निपटें ? How to deal with shyness in Hindi

How to deal with shyness in Hindi

मुझे याद है जब बचपन में कोई अजनबी मुझे मेरे घर आता दिख जाता था तो मैं भागकर बेड के नीचे छुप जाता था, या फिर रूम में आँखे बंद कर सो जाता था, और माँ को कह देता था की मेरा पूछे तो बता देना की या तो बाहर गया हुआ हूँ या फिर नींद में सो रहा हूँ। हालाँकि अब में ऐसा नहीं करता हूँ और मुझे किसी अजनबी से मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती है और भी मेरे जैसे कितने ही लोग रहे हैं जिन्हें अब लोगों से बातचीत करने में अच्छा महसूस होता है, पर पहले बहुत शर्मीलापन उनमें था। शर्मीलेपन में हमे उन लोगों से मिलने से डर लगता है जिनको हम नकारात्मक मानते हैं।

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शर्मीलापन एक आदत है और इसको आसानी से दूर किया जा सकता है। शर्मीले लोग अक्सर किसी से बात करने के बाद इस बात पर बहुत सोच विचार करते हैं की क्या सही कहा और क्या नहीं कहना चाहिए था। शर्मीले लोग आसपास की घटनाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

शर्मीलापन हमारे आत्मविश्वास को कम करता है, हमे बदलाव से डराता है और हमारी प्रगति में शर्मीलापन सबसे बड़ी बाधा बनता है जबकि हमारे पास अच्छी योग्यता है।

हमारे अंदर शर्मीलापन हमारी परवरिश की वजह से आता है, जैसे हमे बचपन में बहुत कम किसी से मिलने – जुलने या घर से बाहर ही ना निकलने दिया गया हो या फिर माँ – बाप और अन्य करीबी रिश्तेदारों के द्वारा हमे कई लोगों की मौजूदगी में किसी बात के लिए शर्मिन्दा किया गया हो। स्कूल प्रबंधन भी गरीब छात्रों को अक्सर फीस टाइम पर ना जमा होने पर मंच पर बुलाकर जलील करते हैं जो उनमे हीन भावना और शर्म को भरते हैं।

किसी गलती के लिए हम खुद शर्मिन्दा महसूस कर रहे हों, तो हमारा मन हमे लोगों के बीच जाने से रोकता है, और हम अपने आपको सीमित दायरे में कुछ गिने चुने लोगों के साथ ही सीमित कर लेते हैं और हमे कम्फर्ट जोन सुरक्षित महसूस करवाता है।

शर्मीलेपन से निपटना तब बहुत जरुरी होता है जब हम प्रोफेशनल लाइफ शुरू करते हैं, क्योंकि हम शर्मीलेपन की वजह से करियर की राह में साथियों की तुलना में पिछड़ जाते हैं।

हम शर्मीले हैं ये सबसे पहले स्वीकार करें और उसके बाद इस बात पर ध्यान दें की हम कहाँ – कहाँ लोगों से संपर्क करने में शर्म महसूस करते हैं जैसे – पारिवारिक फंक्शन, रिश्तेदारों से बात करना, स्टेज पर स्पीच देना, ऑफिस मीटिंग, बॉस से बात करने, पड़ोसी से कुछ मांगने, दुकानदार से बात करने इन सब बातों को एक डायरी में नोट कर लें।

शर्मीलापन दूर करने लिए सबसे पहले ये सोचना बंद कर दें की लोग आपकी हर चीज को नोटिस करेंगे जैसे – आप कैसे बोलते हैं , कैसे कपडे पहनते हैं, कैसे चलते हैं। शर्मीले लोग अक्सर ये सोचते रहते हैं की दूसरे लोग उनको ही नोटिस करते हैं।

अपना नजरिया बदलें। अपनी आँखें बंद करें और कल्पना करें की आप को किसी से कोई डर नहीं लगता आप किसी से भी बात कर सकते हैं। आप निर्भय हैं। आप अकेले शर्मीले इंसान नहीं हैं आपसे भी ज्यादा शर्मीले लोग इन दुनियां में मौजूद हैं, आप शर्मीलेपन को छोड़ चुके हैं और अभी आप बिल्कुल भी शर्मीले नहीं हैं।

दूसरे लोग आपसे कम बेवकूफ नहीं हैं, जब उनको कोई शर्म नहीं हैं तो फिर मुझे शर्म कैसे आ सकती हैं। अपने आप को आत्मविश्वासी और पूरी तरह मजबूत व्यक्ति के रूप में महसूस करने की कोशिश करें, धीरे – धीरे ये कल्पना आपमें स्थायी हो जायेगी। अपने आप को शीशे के सामने खड़ा करके आत्मविश्वासी के रूप में देखें।

अपने आप को किसी जल्दबाजी में ना रखें आराम से चलें , चलते हुए ठोकर ना खाएं, लोगों की आंखों में देखकर बात करें, आराम से धीरे बोलें, एकदम सीधे होकर चलें, धीरे धीरे गहरी सांस लें ये आपके मन में मची उथल – पुथल को कम करेगा।

हर किसी को खुश आप नहीं कर सकते हैं, अपनी ख़ुशी के लिए ज्यादा काम करें, लोग क्या कहेंगे इस बात पर कम से कम ध्यान दें।

मीटिंग में बात कहते समय लोगों के चेहरों की तरफ ज्यादा ध्यान ना देकर अपनी बात कहें, लोगों को सुनते समय उनकी आँखों में आँखे डालकर सुनने की कोशिश करें। रिजेक्शन का डर दिमाग से निकाल फेंके और अपने आप से कहें की में रिजेक्शन के मामले में रिकॉर्ड बनाऊंगा।

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