पब्लिक स्पीकिंग क्या है, पब्लिक स्पीकिंग टिप्स। Public Speaking Meaning in Hindi, Public Speaking tips in Hindi.

एक लीडर को एक शानदार पब्लिक स्पीकर भी होना जरूरी है, चाहे आप कॉरपोरेट में हो या राजनीति में या फिर युद्ध का मैदान, हर जगह जहां भी लीडर की जरूरत होती है वहां लीडर बेहतर वक्ता ना हो तो टीम हारेगी, जोशीले भाषण हमने इतिहास की किताबों में भी पढ़े हैं जैसे चंगेज खान का भाषण, पुराने समय में आपके इर्द गिर्द के लोग ही सुन पाते थे जबकि आज आप पूरी दुनियां को सुना सकते हैं, और सबको अपनी भाषण कला से कायल कर सकते हैं, आज मोटिवेशनल स्पीकर लाखों रुपए लेते हैं मोटिवेट करने के आज इस लेख में हम जानेंगे बेस्ट स्पीकर बनने के टिप्स।

पब्लिक स्पीकिंग किसे कहते हैं ?

किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सार्वजनिक रूप से लोगों को सामने यानी लाइव संबोधित करना, जिसमे लोग वक्ता की बातों से प्रभावित हों और स्पीकर की बातों में अपना विश्वास प्रकट करें, पब्लिक स्पीकिंग का उद्देश्य लोगों की प्रशंसा करना, किसी के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट करना, कुछ सिखाना, प्रेरणादायक बातें बताना या मनोरंजन भी हो सकता है।

पब्लिक स्पीकर संबोधन के दौरान हकलाता है, पानी पीता है बार बार, बीच में रूक जाता है तो सुनने वाले उसकी बातों में विश्वास नहीं कर पाते, लगातार फ्लो में बोलना सुनने वालों को प्रभावित करने के लिए जरूरी है।

स्टेज के डर को वैसे ग्लासोफोबिया कहा जाता है लेकिन बहुत बार इंसान शर्म, संकोच और अनुभव की कमी की वजह से नहीं बोल पाता है, पब्लिक स्पीकिंग एक कला है और कला को सीखा और संवारा जा सकता है, आज कल बहुत सारे पब्लिक स्पीकिंग कोर्सेज बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन बाजार सिर्फ बेचने पर चलता है आपको ग्रूम करने पर नहीं।

टॉप 8पब्लिक स्पीकिंग टिप्स

आठ टिप्स में जानेंगे की आप एक अच्छे वक्ता के लिए क्या जरूरी है, शुरुआत में आपको कैसे अपने आपको शांत और अच्छे तरीके से बोलने के लिए तैयार करना है।

1. भाषण को याद ना करें लिखकर बोलें –

भाषण याद करके बोलेंगे तो आपको बीच में भूलने का डर रहेगा, जब आप याद करके बोल रहे होंगे तो एक शब्द भी भूल गए तो आपका माइंड कन्फ्यूज हो जायेगा की आगे क्या बोलना है, आपको संकोच या शर्म महसूस हो रही है बोलने में तो आप सौ प्रतिशत भूल जायेंगे और बीच में बोलना रुक जायेगा, जब तक आप पब्लिक स्पीकिंग में सहज ना हों हमेशा लिखकर ही बोलें।

लिखकर बोलने से आपको सुनने वालों की तरफ ध्यान से ज्यादा देखने की जरूरत भी नहीं रहेगी, कुछ समय तक लिखकर बोलेंगे तो फिर बिना लिखे बोलने में एक्सपर्ट हो जायेंगे, आप एक्सपर्ट क्यों हो जायेंगे इसका कारण है आपका बार बार लिखकर बोलने का अभ्यास।

2. अच्छे से दर्पण के सामने अभ्यास करें –

आप उन लोगों के सामने भाषण देने का अभ्यास कर सकते हैं जो आपके परिवार के लोग आपके साथ घर में रहते हैं, यदि आप अकेले रहते हैं तो फिर दर्पण के सामने खड़े होकर बोलने का अभ्यास करें, परिवार के लोग आपसे परिचित हैं और आपको कोई संकोच या शर्म उनके साथ महसूस नहीं होगी क्योंकि वो आपके भाषण में गलतियां नहीं ढूंढेंगे, हमे अनजान लोगों के सामने ही बोलने में डर लगता क्योंकि हम लगता है की सामने बैठे लोग हमारी कमियां ढूंढेंगे, जबकि ऐसा होता नहीं की लोग हमारी कमियां ढूंढे, सामने बैठे लोगों को तो पता भी नहीं चलेगा हमारी कमियों के बारे में पर हम खुद ही हमारी कमियां ढूंढे जा रहे हैं।

आपने कितनी ही बार सुना और पढ़ा होगा की राजनेता बहुत बार ऊल जलूल बातें बोल जाते हैं फिर भी वो भाषण देना नहीं छोड़ते, क्योंकि वो बातें उनको नहीं लगता की गलत बोली गई हैं सिर्फ सुनने वालों को ही ऐसा लगता है, आप भी खुद अपनी कमियां ना ढूंढे तो आपको भी महसूस नहीं होगा की आप क्या बोल गए।

3. विषय पर अपनी मजबूत पकड़ बनाएं –

आप हिन्दी के अध्यापक हैं और मैं आपको कहूं की गणित विषय की सेमिनार में कुछ बोलें आप क्या बोलेंगे आपको तो कवियों के बारे में पता है पाइथागोरस के बारे में तो आपने बस सुना ही होगा, आप जिस विषय के बारे में जितना पढ़ेंगे और सुनेंगे तब आपकी उस विषय पर पकड़ होगी, गली के नुक्कड पर बैठा पानवाला राजनीति की बहुत सी बातें कर लेता हैं क्योंकि हर रोज अखबार में तीन घंटे तक पढ़ता है।

आप अपने विषय के शानदार वक्ताओं को यूट्यूब पर सुन सकते हैं उनकी लिखी किताबों को पढ़ सकते हैं, ज्ञान जितना ज्यादा होगा उतना ही आपको उस विषय पर बोलना अच्छा लगेगा, आप मिनटों से कितने ही घंटों तक श्रोताओं को अपने से जोड़कर रख पाएंगे, आपकी बातों में श्रोताओं और दर्शकों का मन लगा रहेगा यदि आप उन बातों को नए तरीके से लोगों के सामने पेश कर पाते हैं।

4. आराम से और धीरे बोलें –

जल्दी जल्दी बोलने से बचें, जल्दी बोलना आपको अशांत दिखाता है और तेज आवाज में बोलना भी डर और आपके अंदर की अशांति को दिखाता है, एक दम धीरे से भी ना बोलें की किसी को खुसर फुसर के अलावा कुछ सुनाई ही ना दें, आराम से बोलना सुनने वालों पर आपका स्थाई प्रभाव छोड़ेगा और आपकी छवि एक मैच्योर इंसान की बनेगी।

जल्दी बोलने के कारण आप रुक रुककर बोलने लगेंगे क्योंकि आप बार बार भूलने लग जायेंगे की आगे क्या बोलना है, धीरे बोलना आपको माइंड को रिलेक्स करेगा जिससे माइंड तेजी से उस वाक्य को सोचेगा जो आगे बोलना है, संबोधन के दौरान लोग आपके चेहरे पर एक शांति देखना पसंद करेंगे।

5. जहां से बोलना है उस मंच पर खड़े होकर बोलने का अभ्यास करें –

आपको स्कूल या कॉलेज या फिर अपने ऑफिस में भाषण देना है तो आपके लिए ये एक मौका है की जहां से स्टेज से आपको बोलना है वहीं खड़े होकर बोलने का अभ्यास करें, आपके मन जो डर बैठा है पब्लिक स्पीकिंग का वो धीरे धीरे कम होने लगेगा, आप सोचते हैं की ये पब्लिक स्पीकिंग के टिप्स पढ़कर आप सीधे कुशल वक्ता बन जायेंगे ये संभव नहीं है, रियल एक्सपेरिमेंट आपको खुद ही करना पड़ेगा तब आप पब्लिक स्पीकिंग में बेहतर हो पाएंगे।

अपने साथियों, दोस्तों को मंच के सामने खड़े करें फिर भाषण दें, आपके दोस्तों को कहें की वो आप पर हंसे और कभी गंभीर होकर सुनें, इससे आपको अनजान लोगों के सामने भी खुलकर भाषण देने में मदद मिलेगी।

6.अच्छे से अपने आपको ड्रेस अप करें –

ज्यादातर सामने बैठे देख रहे लोग आपकी ड्रेस और आपके बाहरी लुक को सबसे पहले नोटिस करते हैं, आपकी बातों में बहुत सारे लोग रुचि नहीं लेंगे, आपके लुक को ही देखकर बहुत सारे लोग दो घंटे का सेशन खत्म कर देंगे, आपको दर्शकों की तुलना में बेहतर कपड़ों को पहनना होगा, चाहे तो आप ब्रांडेड कपड़े पहन सकते हैं, हो सके तो ब्रांडेड कपड़े ही पहने।

7.दर्शकों को दोस्त समझें –

अपने दोस्तों के बीच में लोग इतना ज्ञान फेंकते हैं की सामने वाले समेट भी नहीं पाते, बस कल्पना करें की मंच के सामने भी दोस्त ही बैठे हैं, आपकी आवाज और बोलने का तरीका एकदम पेशेवर हो जायेगा, आपको कोई डर नहीं रोकेगा आत्मविश्वास आसमान पर होगा।

दोस्तों की कल्पना आपको मानसिक शांति का अनुभव करवाएगी,आपको गलतियों से डर नहीं लगेगा, आपको भाषण सामान्य बातचीत की तरह लगेगा।

8.बोलने से पहले दस मिनट ध्यान करें –

ध्यान हमारे मस्तिष्क को एक दिशा में सोचने के लिए तैयार करता है, मन की उथल पुथल जिसमे बहुत सारे विचार चल रहे होते हैं उनको नियंत्रित करता है, वर्तमान के प्रति हमारे नजरिए को पॉजिटिव करता है, दस मिनट कुर्सी पर बैठकर अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो मंच पर आप घबराहट से बचेंगे।

निष्कर्ष – पब्लिक स्पीकिंग का डर होने के कारण हैं हमारा लोगों से मिलने जुलने में कतराना, पारिवारिक माहौल, या फिर कहीं हमने बोलने की कोशिश की और लोगों ने कुछ मजाक बना लिया उस बात का, हमारे करियर में सफलता के लिए जरूरी है की हम पब्लिक स्पीकिंग में महारत हासिल करें, आपको ये लेख पढ़कर कुछ हासिल हुआ होगा।

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