How to start SIP in Hindi. सिप क्या है कैसे निवेश करें।

SIP का Full form – SYSTEMATIC INVESTMENT PLAN, सिप के बारे में हमने कुछ समय से काफी सुना है, SIP में पिछले 15 सालों में average return की रेट 18% से ऊपर रही है, यही इसकी लोकप्रियता का कारण है, तो आइए हम जानते है की सिप क्या है, इसमें इन्वेस्ट कैसे किया जाता है, सिप में क्या प्रॉफिट है क्या कुछ नुकसान भी होते है क्या, और सिप कितने प्रकार का होता है और इसके नुकसान कैसे कम किए जा सकते हैं।

सिप क्या है ( Means of sip in Hindi )

सिप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने का एक तरीका है, जिसमे आप एक छोटी सी राशि मात्र 500 से 1000 से भी इन्वेस्ट शुरू कर सकते हैं, इसमें आप नियमित तौर पर जैसे–हर हफ्ते, हर महीने, हर तीसरे महीने, अपनी सुविधानुसार, अपनी आय का एक हिस्सा विभिन्न म्यूचुअल फंड्स स्कीम्स जैसे – इक्विटी (स्टॉक मार्केट),Debt funds और बॉन्ड्स इन्वेस्ट किया जाता है, ये अलग अलग स्कीम्स में पैसा इसलिए लगाया जाता है ताकि एक स्कीम में प्रॉफिट कम हों तो दूसरी में ज्यादा होने पर एक ओसत प्रॉफिट मिल सके।

How to start SIP in Hindi.

सिप में निवेश कैसे शुरू करें ( How to start invest in SIP in Hindi )

  1. अपनी आवश्यकताओं को देखें –

सिप में इनवेस्ट करते समय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इन्वेस्ट करें, जैसे – घर खरीदना, बच्चों की एजुकेशन, रिटायरमेंट, इन जरूरतों को पूरा करने के लिए कब कितने पैसे की आपको जरूरत पड़ेगी उसको ध्यान में रखकर 5 साल 15 साल व 20 साल के लिए अपनी क्षमता के अनुसार कितना इन्वेस्ट कर सकते हैं इसका आकलन करें।

2. SIP में सही फंड्स को चुने–

आपकी रिस्क लेने की क्षमता को ध्यान में रखकर फंड चुने, इक्विटी फंड में High risk – high return का फॉर्मूला लागू होता है, तो इसमें सावधानी बरते, इक्विटी फंड में large cap companies में इनवेस्ट करेंगे तो रिस्क कम रहेगा पर return भी कम रहेगा, जबकि आप small cap companies में इनवेस्ट करेंगे तो return high रहेगा रिस्क भी high रहेगा, आप mid cap companies का भी चुनाव कर सकते है।

Debt funds का भी चुनाव कर सकते है पर इसमें low risk – low return का फॉर्मूला लागू होता है,

वैसे आंकड़ों के अनुसार young इन्वेस्टर ज्यादा risk वाले फंड्स चुनते है बाकी दूसरे लोग कम रिस्क वाले फंड्स में इनवेस्ट करना पसंद करते है।

3. सिप की राशि तारीख तय करें –

अपनी सुविधा के अनुसार सिप में पैसे जमा करने की तारीख, हर महीने जमा करेंगे, साप्ताहिक जमा करेंगे, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक के साथ ही साथ कितनी राशि जमा करेंगे और कितने वर्ष के लिए सिप में इनवेस्ट करेंगे,अलग अलग स्कीम्स में निवेश करने की तारीख अलग अलग होती है।

4. KYC को पूरा करे–

फंड हाउस की ब्रांच में केवाईसी फॉर्म भरे, सेल्फ अटेस्टेड आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ, PAN CARD और passport size फोटो, cancelled cheque of associated bank, latest bank statement.

SIP के लाभ ( benefits of sip in hindi )

1. एक छोटी राशि से शुरुआत-

आप मात्र 500 रूपये महीने से इसमें निवेश की शुरुआत कर सकते है, जिससे आपको अपने खर्चों में कटौती करने की जरूरत नहीं है, इसमें एक स्टूडेंट से लेकर गृहिणी तक कोई भी इन्वेस्ट कर सकते हैं।

2. सुविधाजनक और बंधन मुक्त–

सिप में आपको बिना किसी बाजार के नॉलेज के म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट की सुविधा मिलती है क्योंकि फंड मैनेजर और निवेश के क्षेत्र एक्सपर्ट लोग अलग अलग स्कीम्स में पिछले सालों में मिले Return को देखकर आपके पैसे को इन्वेस्ट करते हैं, और बाजार के उतार चढ़ाव पर आपको सूचित करते रहते हैं. आप जब चाहे सिप से अपना पैसा निकाल सकते हैं, जब चाहे इन्वेस्ट रोक सकते यानी आपकी मर्जी से close and pause कर सकते हैं, आप चाहे तो अगले महीने से फिर इन्वेस्ट शुरू कर सकते हैं, ना इससे आपके पहले के इन्वेस्टमेंट पर कोई असर पड़ता है।

Regular इन्वेस्टमेंट आपको पैसे खर्च करने के मामले में Disciplined बनाता है,

3. Compounding growth

सिप में आपके इन्वेस्टमेंट पर आपको जो रिटर्न मिलता रहता है और वो ही रिटर्न वापिस उसी में इन्वेस्ट होता रहता है, ये रिटर्न का रकम जो उसमे वापिस आपके इनवेसटमेंट में जुड़ता है वो आगे चलकर एक बड़ी राशि में कन्वर्ट हो जाता है, जैसे ब्याज पे ब्याज मिलना कहते है वो ही compounding method होता है।

4. बाजार की तेजी और मंदी के तनाव से मुक्ति

सिप में लंबे समय तक हर महीने एक फिक्स रकम का इन्वेस्टमेंट होता रहता है इसमें जब बाजार मंदी की तरफ जाता है तब आप सस्ती रेट में ज्यादा इक्विटीज खरीद पाते है और जब तेजी आती है तो आपके द्वारा खरीदी हुए इक्विटीज का मूल्य ज्यादा हो जाता है, इसलिए आप ऑल टाइम फायदे में रहते हैं।

क्या सिप में रिस्क है

सिप बाजार की तेजी और मंदी से जुड़ा हुआ है तो इसमें जोखिम है क्योंकि बाजार ऊपर नीचे होता रहता है कोई नही कह सकता की फ्यूचर में क्या होगा।

1. मार्केट से जुड़े रिस्क

म्यूचुअल फंड या सिप हमेशा बाजार की तेजी मंदी के अनुसार रिटर्न देते है, बाजार में तेजी में रिटर्न ज्यादा होगा मंदी में कम, बाजार में तेजी या मंदी कई चीजों से प्रभावित होती है जैसे आरबीआई की नीतियां, प्राकृतिक आपदा, देश के राजनीतिक हालात, आपको इसमें लगातार धैर्य रखना होता है। जब मार्केट तेज होगा तो आपको अच्छा रिटर्न मिलेगा,वैसे मंदी में भी एफडी से ज्यादा रिटर्न सिप में आपको मिलेगा।

2. बाजार में फ्रॉड–

बहुत सारी न्यूज हम आज कल सुनते है की वो कंपनी डूब गई वो बैंक डूब गया, ये सब कंपनीज पहले से घाटे में होती है पर इन्वेस्टर को हर संभव तरीके से धोखे में रखती है।जब आप सिप लेते है तो fund मैनेजर और शेयर मार्केट के एक्सपर्ट पिछले सालों में विभिन्न स्कीम में मिले return को देखकर पैसा लगाते है, पर हो सकता है, पिछले साल अच्छा return देने वाली कंपनी है वो इस साल फेल हो जाए, पर इस तरह की घटनाएं बाजार में कम होती हैं।

2. अलग – अलग fund में इनवेस्ट ना करना –

कहावत तो आपने सुनी होगी सारे फल एक टोकरी में ना रखे, आपने ज्यादा पैसा मात्र एक या दो स्कीम में लगा रखा है तो आपको खतरा ज्यादा है, आपको अलग अलग जगह थोड़ा थोड़ा इनवेस रखना चाहिए जिससे एक दो जगह नुकसान हो तो दूसरी जगह फायदा मिल सके।

सिप कितने प्रकार का होता है–

सिप mostly चार प्रकार के होते है

1. Top up sip

आपकी कमाई और बचत future में जैसे ही बढ़ती है या गिरते हुए मार्केट में ज्यादा इक्विटी खरीदना चाहते है तो आप इंवेस्टमेंट को बढ़ा सकते है,आपको नया सिप खोलने की जरूरत नही है, आप चाहे की सिप में इन्वेस्टमेंट के छह महीने बाद आपके पास पहले के मुकाबले ज्यादा पैसा बच रहा है तो आप सिप को 500 रूपये महीने से बढ़ाकर 1000 रूपये महीने कर सकते है, इसके बाद भी आप लगातार सिप में इन्वेस्टमेंट बढ़ा सकते है

2. Perpetual sip

जब आप टॉप अप सिप में इन्वेस्टमेंट शुरू करते है तो आपको एक अंतिम तारीख देनी होती है की आप पांच या दस, बीस साल के बाद उस तारीख तक इन्वेस्टमेंट करेंगे, उस तारीख के बाद बैंक खाते से पैसा सिप में जाना बंद हो जाता है,जबकि perpetual sip में आप कितने भी लंबे समय तक इन्वेस्ट कर सकते हैं, आपको सिप रिन्यू करवाने की जरूरत नहीं है, इसमें आपको सिप तो स्टॉप करने के लिए फंड हाउस को inform करना होगा।

3. Flexible sip

ये सिप उनके लिए है जिनके पास एक फिक्स नियमित आय नहीं होती है, इसमें आप जब चाहे इंवेस्टमेंट की राशी घटा सकते है और बढ़ा सकते है, आपके पास पैसे कम या ज्यादा को ध्यान में रखकर । इसमें आपको सिप installment की तारीख से सात दिन पहले अपनी राशी घटाने या बढ़ान का विकल्प दिया जाता है।

4. Trigger sip

आपके पास इक्विटी मार्केट के जानकार है और लगातार मार्केट के उतार और चढ़ाव पर नजर रख सकते हैं तो ये ऑप्शन आपके लिए है, इसमें आप एक स्कीम से दूसरी स्कीम में तुरंत जा सकते है, किसी स्कीम में इनवेस्ट बढ़ा सकते हैं और रोक सकते हैं, आपको लगता है की मार्केट लंबे समय के लिए नीचे जायेगा तो आप सिप से पैसा निकाल सकते है।

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